PM का चित्रकूट दौरा, धर्मनगरी में पहली बार आये मोदी ने नानाजी देशमुख को किया याद

सतना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को मध्‍यप्रदेश में थे। उन्‍होंने चित्रकूट के घाट पर एक कार्यक्रम के दौरान नानाजी देशमुख को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'कामद भे गिरि राम प्रसादा, अवलोकत अपहरत विषादा'। अर्थात चित्रकूट के पर्वत, कामदगिरि, भगवान राम के आशीर्वाद से सारे कष्टों और परेशानियों को हरने वाले हैं। चित्रकूट की ये महिमा यहां के संतों और ऋषियों के माध्यम से ही अक्षुण्ण बनी हुई है। पूज्य रणछोड़दास जी ऐसे ही संत थे। उनके निष्काम कर्मयोग ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। स्वर्गीय अरविंद भाई मफतलाल के शताब्दी जन्म वर्ष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे खुशी है कि अरविंद भाई का परिवार उनकी परमार्थिक पूंजी को लगातार समृद्ध कर रहा है। मैं इसके लिए उनके परिवार के सभी सदस्यों को बधाई देता हूं। स्वर्गीय अरविंद भाई मफतलाल के शताब्दी जन्म वर्ष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जानकीकुंड चिकित्सालय के नए विंग का लोकार्पण हुआ है, इससे लाखों मरीजों को नया जीवन मिलेगा। आने वाले समय में सद्गुरू मेडिसिटी में गरीबों की सेवा के इस अनुष्ठान को नया विस्तार मिलेगा। इस अवसर पर अरविंद भाई मफतलाल की स्मृति में भारत सरकार ने विशेष स्टैंप भी रिलीज किया है। ये पल अपने आप में हम सबके लिए गौरव का पल है, संतोष का पल है। मैं आप सबको इसके लिए बधाई देता हूं।आपको बता दें कि नानाजी देशमुख भारतीय जनसंघ के कद्दावर नेता थे। वह राज्यसभा के सदस्य भी थे। नानाजी देशमुख का पूरा नाम चंडिकादास अमृतराव देशमुख था। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण स्वावलंबन के क्षेत्र में काम किया। उन्हें मरणोपरांत सरकार ने 2019 में देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया था। नानाजी का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को कडोली में मराठी भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। यह हिंगोली जिले का छोटा सा शहर है। अपनी शिक्षा के लिए पैसे जुटाने की खातिर उन्होंने सब्जी बेचने तक का काम किया। उन्‍होंने सीकर से हाई स्कूल किया। सीकर के रावराजा ने नानाजी को स्‍कॉ‍लरशिप दी। फिर उन्होंने बिड़ला कॉलेज (अब बिड़ला स्कूल, पिलानी) में पढ़ाई की। उसी साल वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में भी शामिल हो गए। नानाजी का जन्म महाराष्ट्र में जरूर हुआ था। लेकिन उनकी गतिविधियों का क्षेत्र राजस्थान और उत्तर प्रदेश था। तत्कालीन आरएसएस प्रमुख एम.एस. गोलवलकर ने उन्हें प्रचारक के रूप में गोरखपुर भेजा था। वह पूरे उत्तर प्रदेश के सह प्रांत प्रचारक बन गए। देशमुख बाल गंगाधर तिलक और उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित थे। सामाजिक सेवा में उनकी दिलचस्‍पी थी। उनका परिवार केशव बलिराम हेडगेवार के संपर्क में था। हेडगेवार देशमुख परिवार से नियमित मुलाकात करते थे। वह नानाजी की क्षमता जानते थे। उन्होंने उन्हें आरएसएस की शाखाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। 1940 में हेडगेवार के निधन के बाद उनसे प्रेरित कई युवा महाराष्ट्र में आरएसएस में शामिल हो गए। देशमुख उन लोगों में से थे जो अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में समर्पित करके आरएसएस के लिए काम करते रहे। आगरा में उनकी पहली बार मुलाकात दीन दयाल उपाध्याय से हुई थी। बाद में देशमुख पूर्वी यूपी में संघ की विचारधारा को लागू करने के लिए प्रचारक के रूप में गोरखपुर गए। तीन साल के भीतर गोरखपुर और उसके आसपास लगभग 250 संघ शाखाएं शुरू हो गईं। उन्होंने 1950 में गोरखपुर में भारत का पहला सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित किया। जब 1947 में आरएसएस ने दो पत्रिकाओं (राष्ट्रधर्म और पांचजन्य) के साथ-साथ एक समाचार पत्र स्वदेश शुरू करने का निर्णय लिया तो अटल बिहारी वाजपेयी को संपादक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दीन दयाल उपाध्याय को मार्गदर्शक बनाया गया था। नानाजी को प्रबंध निदेशक बनाया गया। 27 फरवरी 2010 में 93 साल की उम्र में उन्‍होंने अंतिम सांस ली।

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